Wednesday, 30 April 2014

*हिन्दी की प्रासंगिकता पर दो टूक*


जब बात हिन्दी की प्रासंगिकता की हो तो हमारे जैसे हिन्दी प्रेमी बात हिन्दी में करें ये अनिवार्य शर्त होती है। बड़ा अफसोस होता है जब हमारे जैसे हिन्दी-भाषी हिन्दी की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हैं। पर यही विडम्बना है- इक्कीसवीं सदी की। जेन-नेक्स्ट हैं हम । करियर बनाना है हमें । कूल-करियर। और कूल तो केवल अँग्रेजी भाषा है। हाँ ये सच है कि अँग्रेजी भाषा आज के समय में बहुत महत्व की भाषा है, सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा। लोग चीनी भाषा को सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा का दर्जा देते हैं पर सच ये है की शुद्ध चीनी भाषा बोलने वालो की संख्या बहुत कम है। हिन्दी को विश्व की दूसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा का दर्जा दिया जाता है परंतु चीनी भाषा की तरह मैं हिन्दी को दिये दर्जे से भी मैं सहमत नहीं हूँ। कौन बोलता है आजकल “हिन्दी” ? माफ कीजिएगा, “शुद्ध हिन्दी”। परंतु हिन्दी का महत्व धूमिल हो गया हो ये मानने को मेरा दिल करता नहीं। पर दिल तो बच्चा है जी... थोड़ा कच्चा है जी। 

जब हम किसी दूसरे देश की सैर करने जाते हैं तो उनकी भाषा, उनके आचार-विचार, व्यवहार के बारे में जानकारी प्राप्र्त करते है और वहाँ जाकर उनकी भाषा में बात करने का प्रयास करते हैं। वहाँ के निवासी हमारे इस प्रयास की सराहना करते हैं। ठीक इसी प्रकार, जब बाहर के देशों से सैलानी हिंदुस्तान आते हैं और वे लोग हमसे हिन्दी में बात करने का प्रयास करते नज़र आते हैं, तब हम क्या करते हैं? हम उनसे अँग्रेजी में बात करने लगते हैं (चाहे वो जापान से आए हो या अफ्रीका से)। >>“हाउ क्यूयूयूयूट”<< टाइप अँग्रेजी। क्योंकि अँग्रेजी कूल है। और हिन्दी बोलने से हमारा मान घट जो जाता है। पर खैर ये तो हमारे “अतिथि देवो भव” वाले संस्कार हैं।

चलिये ठीक है मान लिया अँग्रेजी विकास की भाषा है। उसके बिना काम चलेगा नहीं। तो भइया अँग्रेजी ही सीख लो। शुद्ध अँग्रेजी। “cool” अँग्रेजी से तो भला होने से रहा। और ये जो हिंगलिश” बोलते फिर रहे हो इसके लिए कोई staunch-अँग्रेज़ या कोई विशुद्ध हिन्दी-प्रेमी तुम्हारा माथा फोड़ दे तो रो-ओगे किस भाषा में?  

आजकल स्कूलों कॉलेजों में फ्रेंच, जरमन, रशन, स्पोकेन-इंगलिश की सेपेरेट-क्लासेस चलती हैं। हिन्दी-उर्दू के लिए कोई सेपेरेट-क्लासेस सुनी हैं कभी? का जरूरत है यहाँ? हम तो पैदाइशी ही हिन्दी के प्रकांड पंडित हैं। पर हाँ विश्व में कई नामी-गिरामी कालेजों और विश्वविद्यालयों में हिन्दी बड़ी रूचि से सीखी और सिखायी जाती है।

फिराक गोरखपुरी, हरिवंश राय बच्चन जैसे लोग अँग्रेजी के प्रकांड विद्वान थे, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अँग्रेजी के जाने माने प्रोफेसर रहे पर उनका पूर्ण साहित्य हिन्दी-उर्दू में रहा... माफ कीजिएगा ये तो पुराने लोग हैं।

अमिताभ बच्चन की बात करते हैं... उनकी हिन्दी सुनकर आनंद तो बड़ा आता है । अरे उ बूढ़ा गए हैं। अँग्रेजी बोलेंगे तो अच्छा नहीं न लगेगा जी। 

अमिताभ बच्चन से याद आया बॉलीवुड यानि हिन्दी फीचर फिल्म उद्योग। पूरे विश्व में चर्चा का विषय है। हमारे गीतकारों का लोहा पूरा विश्व मानता है। जो जज़्बात, रुआब, और गहराई हिन्दी-उर्दू के गीतों आदि में महसूस होती है, वो अतुल्य है। पर आजकल बॉलीवुड भी तो “कूल” होता जा रहा है। “Yo Yo Honey Singh-a”

... और ‘Bigg Boss’ की आवाज़ का कौन कौन दीवाना है यहाँ? शिट! वो हिन्दी में बोलते हैं क्या?
और हमारे मोदी जी ... आहा! हमारे भावी प्रधानमंत्री जी... जिनके भाषण को हमारी जेन-नेक्स्ट मंत्र-मुग्ध होकर सुनती है, अरे पर वो तो गुजराती छे! बट मोदी जी की तरह हमारा भी “दिल मांगे मोर” ।  

और मैं देवनागरी लिपि (जिस लिपि में हिन्दी लिखी जाती है) में कम्प्युटर पर कैसे लिख पा रही हूँ? हिन्दी वाला सॉफ्टवेयर बना दियो क्या कौनों लौंडा? खुराफातियों की कमी नै न।
आप सोच रहे होंगे कि मैं विषय से भटक रही हूँ । अगर मैं हिन्दी की इतनी ही वकालत करती हूँ तो हिन्दी की प्रासंगिकता के लिए मुझे कुछ तथ्य-प्रेरित तर्क देने चाहिए। पर जनाब आप ऊपर दिये हुये सभी वाक्यों को पुनः पढ़ें। मैं यहाँ हिन्दी की सार्थकता की वकालत नहीं कर रही, हिन्दी के घटते महत्व पर ही प्रकाश डाल रही हूँ। Oh yeah!

भले ही “दूर के ढ़ोल सुहावने” और “घर की मुर्गी दाल बराबर” जैसी कहावतें आज भी प्रासंगिक है, हिन्दी की प्रासंगिकता पर प्रश्नचिन्ह से मुझे कोई आपत्ति नहीं। सत्य सत्य होता है। हिन्दी के दिन अब लद रहे हैं। हमारी जेन-नेक्स्ट कूल है। हिन्दी से कुछ भला होने वाला नहीं है। अँग्रेजी, टूटी फूटी ही सही इंप्रेशन जमाती है। और भाई ये इंडिया है... यहाँ ग्रामर और शुद्ध अँग्रेजी से किसे लेना देना है । Mah lyf, mah RulZzz Cool... yeah? और बाकी हिंगलिश” तो हय्ये जिंदाबाद। आखिर हिन्दी हमारी राजभाषा है, पूरी तरह भुला तो नहीं सकते न हम उसे । राजभाषा? पर कल तक तो राष्ट्रभाषा थी बे? ओह येह? इन योर ड्रीम्स..!. -_-

जय हिन्दी । जय भारत।

यो बेब्स यो!

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