बात उन दिनो की है जब हम कॉलेज में पढ़ा करते थे। कॉलेज में क्या
पढ़ते थे वो तो हम ही जानते हैं पर जब फीस डिपॉज़िट करवा दी हो और 3 साल के डिग्री
कोर्स में एनरोलमेंट हो गया हो तो ऐसा कहा जाता है।
कॉलेज में साइकोलॉजी और इंग्लिश लिटरेचर हमारे सब्जेक्ट्स थे पर
दिमाग ज़रा हमारा प्रोग्रामर टाइप था। इसलिए C language सीखने के लिए पिताजी की जेब कुछ और ढीली करवाई और चल पड़े अपने पहले प्यार
को पाने की ख़्वाहिश में। C language
पढ़ते पढ़ते ये जाना कि प्रोग्रामर और पोएट में कुछ ज्यादा फर्क नहीं होता । दोनों
टाइप के लोगो के लिए सेमी-कोलन का बहुत महत्व होता है । और ‘void’ शब्द की महत्ता भी या तो प्रोग्रामर समझ सकता है या पोएट। हाँ मानता हूँ, बड़ी विअर्ड सी एनालोजी है ये। और ये भी मानता हूँ कि C पढ़ने से कोई प्रोग्रामर नहीं बन जाता और न ही हर सेंटेन्स के बाद
सेमी-कोलन लगा देने से कोई पोएट; पर ये तो आप भी मानेंगे कि
प्राइमा-फेसी एक C language का
प्रोग्राम पोएम जैसा ही लगता है।
अच्छा ठीक है भई, हटाइए... मैं
बेकार में ही साबित करने की कोशिश कर रहा हूँ कि मुझे प्रोग्रामिंग और पोएट्री की डीप
नॉलेज है। न वो मानी थी न आप मानेंगे। हाँ समझ गया मैं कि समझ गए आप। मैंने
बेसिकली उसी के लिए C की क्लासेस जॉइन की थीं वरना हमें तो
प्रोग्रामिंग की ए और बी भी नहीं आती, कहाँ सी, सी प्लस प्लस और सी शार्प। किसी विक्टोरियन पोएट की पोएम जैसी थी वो...
उसे देखते ही मेरे दिल की धड़कने इंफाइनाइट लूप में धड़कने लगतीं। उसकी स्माइल, जैसे मेरे लिए रिर्वस साइकोलोजी का क्वेस्चन पेपर थी- टोटली कन्फ़्यूजिग! उसके
आने की चुगली उसकी घुंगरू वाली पायल कर देती और मेरा पप्पी-लव-कंटेनिंग-हार्ट
बल्लियाँ उछलने लगता.
उस दिन उसने मुझे एक ‘हार्ट शेप्ड
पैटर्न’ के अंदर ‘आई लव यू’ प्रिंट करवाने का प्रोग्राम रन करवाने को दे दिया. लड़कियां भी आई टेल यू, समझती सब है बट दे गेट सम सैडिस्टिक
प्लेज़र इन दिस. खैर, मैंने भी सेरीअसली कोडिंग करने का पूरा
प्रेटेंड किया, इम्प्रेशन जो जमाना था और जब कुछ नहीं हुआ तो
जानबूझ कर इंफाईनाइट लूप में ‘आई लव यू’ प्रिंट करवा दिया. चांस पे डांस, यू सी. और बाई
गॉड! उस दिन जब उसे खिलखिला कर हसते हुये देखा तो मेरा डेलीकेट सा पप्पी हार्ट जिस
ईंटेंसिटी से धड़का था कि क्या बताऊँ... दौरा पड़ते पड़ते रह गया. जीसस जस्ट सेव्ड
मी! और फिर उसने अपना ऐम्बर-कलर्ड नेट का दुपट्टा झटकते हुए ‘लूजर’ कहा था, और नॉनस्टॉप
हसने से सूर्ख हो गए चेहरे पे कातिल मुस्कान बिखेरते हुये चली गयी थी. हाए!
हम तो आज भी उसकी उस खिलखालती
हुई हसी और कातिलाना मुस्कान की कैद में हैं। कलाई पर ‘फकिंग
लूजर’का टैटू बनवा लिया है ताकि पहले प्यार की वो वन एंड ओन्ली हैप्पी
मेमरी भुलाए से भी ना भूले!
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